उनका प्यार

उनका प्यार

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मुझे वह किराए का घर कल ही खाली कर देना था। लेकिन कल रात भारी वर्षा होने के कारण मैं नहीं जा सका। मुझे मकान मालिक ने बताया था कि आज एक नई किराएदार रहने आने वाली है। मैं सोच में था कि अगर वह आज आ गई तो मेरे लिए मुसीबत ही हो जाएगी। मैं भगवान से मना रहा था कि काश वह आज ना आए। मैंने अपनी सारी पैकिंग कल दिन में ही कर ली थी। लेकिन कल जा ना सका था। लेकिन हां आज रात को मैं जरूर जाऊंगा।

 सुबह मेरी नींद उस वक्त खुली जब खिड़की से सूरज की किड़ने मेरी आंखों पर पड़ कर उसे सहला रही थी। सुबह में ठंडी होने के कारण मैं अपने कंबल में ही दुब्का रहा और मूवी देखता रहा। जब शायद 10:00 बजे तो मेरे दरवाजे पर किसी ने दस्तक दिया। जब मैंने दरवाजा खोला तो वहां एक मासूम सी लड़की खड़ी थी। मैं उन्हें देखते ही समझ गया था कि हो ना हो यही वह लड़की हैं जो इस घर में रहने आई हैं। उन्होंने मुझे देखते ही कहा तुम तो कल ही घर खाली कर देने वाले थे ना । वहां पर उनकी आंखों में मैं एक बदतमीज लड़का झलक रहा था। मैं उनसे बताया कि मैं चला जाने वाला था लेकिन मैं आज जाऊंगा। इसके लिए मैं आपसे क्षमा चाहता हूं। वो कुछ नहीं बोली और घर के अंदर आ गई। फिर से मैं कमल में जाकर बैठ गया। मैं महसूस कर सकता था हर 2 मिनट के बाद मैं किसी की निगाहों में होता था। मैं उन्हे देख रहा था। वह घर को अपने नाम की पहचान दे रही थी। धीरे-धीरे मैंने ही बात शुरू की कि आप कहां से हैं? उन्होंने बताया कि वो गिरिडीह, झारखंड से आई हैं। 

वो अभी भी अपने काम में व्यस्त थी। तो मैं चुप रह गया ।

 कुछ देर बाद वो खुद ही मेरे बिस्तर पर बैठीं और उन्होंने मुझसे पूछा कि आज रात तुम्हें कहां जाना है यानी तुम कहां से हो? तो मैंने बताया उन्हें - कि मेरा घर पश्चिमी चंपारण, बिहार में है। धीरे-धीरे हमारे बीच बातों का सिलसिला बनता गया । बातों बातों मे उन्होंने मुझे यह भी बताया की वह एक शास्त्रीय गायिका हैं। और वह बनारस में अपने परिवार से झगड़ा करके अपनी जिंदगी को बनाने आई हैं। उनका मानना था कि कभी ना कभी वह अपने परिवार वालों को अपने पक्ष में कर ही लेंगी। सिर्फ फिलहाल ही उनके और उनके परिवार के बीच में कुछ दूरियां थीं। बातों बातों में हम दोनों काफी आगे निकल चुके थे। यहां तक कि उन्होंने मुझे यह भी बताया कि क्यों उनके परिवार उन्हें अकेले नहीं रहने देते, क्यों उनके परिवार उनको अकेले में सुरक्षित महसूस नहीं करने देते। उन्होंने बताया मुझे कि जब वह इलेवंथ-ट्वेल्थ में थी तो अपने परिवार से काफी दूर अकेले थी। उस वक्त उनकी जीवन में एक लड़के का आगमन हुआ था। एक बहुत ही मासूम लड़का, पढ़ाई में ज्यादा तेज तो नहीं थे।

लेकिन हां बाकी सब से कमजोर भी नहीं थे। उनका पैशन था सिंगिंग लेकिन अपनी परिवार की वजह से वो इंजीनियरिंग की पढ़ाई कर रहा थे। दीदी को काफी पसंद थे वह भैया। लेकिन कभी भी दीदी ने उनका इजहार नहीं किया। नहीं कभी अपने परिवार वालों में और ना ही कभी उन भैया के सामने। अगर किसी के सामने उन्होंने इजहार किया था तो वह था उनका डायरी जिसे वह 1 साल पहले मुंबई स्टेशन पर छोड़ आई थी। वह नहीं चाहती थी वह भैया के अतीत में जीना नहीं चाहती थी कि भैया का याद उनके जिस्म मे एक बार और खलबली मचा जाए। बहुत ही दूर चले जाना चाहती थी वो भैया से । क्योंकि शायद जिस प्यार की उन्होंने अपेक्षा की थी वो नहीं मिला । शायद, कहते हैं ना सच्चा इश्क हमेशा अधूरा ही रह जाता है। एक बार काफी मशक्कत के बाद उन्होंने भैया के सामने इजहार भी किया था। कि वह भैया बहुत ही अच्छे लगते हैं। ऐसा बिल्कुल भी नहीं था कि भैया ने इंकार कर दिया हो। भैया ने भी बताया कि हां तू भी अच्छी लगती है। उन्होंने साथ में ट्वेल्थ की 6 महीने गुजारे थे। और उन्होंने वादा भी किया था कि सारी जिंदगी हमेशा एक साथ रहेंगे। दीदी भैया के हर एक ख्वाब से वाकिफ हो चुकी थी।

उन्हें पता लग गया था कि तो सिर्फ एक कोर्स है एक पढ़ाई है लेकिन वस्तु में उन्हें एक गायक बनना था प्लेबैक सिंगर उन दोनों ने साथ में न जाने कितने ख्वाब देखे थे और किस तरह से वह दोनों दुनिया की हर खुशी कि रंगों को देखेंगे और उन रंगों में खुद को घोल देंगे।

लेकिन ऐसा कुछ भी नहीं हुआ जब ट्वेल्थ खत्म हुआ तो। वह अचानक से कहीं गायब हो गये । और दीदी भैया को ढूंढने का बहुत कोशिश की। हर जगह, पूरे सोशल मीडिया पर छान मारी लेकिन भैया कहीं नहीं मिले। खुद ही 6 महीने बाद उनका एक ईमेल आया था- ईमेल में लिखा हुआ था - मुझे कैंसर है, और मैं नहीं चाहता कि मैं अपना अस्तित्व तुमसे जोड़कर तुम्हारी जिंदगी को भी बर्बाद कर दूं। इसलिए मैं तुमसे दूर हूं । उन्होंने ये भी बताया था कि शायद दवाईयो के सहारे वो दस साल और जी सकते है। लेकिन सिर्फ दस साल। यह सारी बातें जानने के बाद दीदी बुरी तरह टूट चुकी थी। उन्होंने अपने घर वालों को बताया कि दीदी भैया के पास मिलने जाना चाहती हैं और चाहती है कि पढ़ाई के बाद वो अपनी जिंदगी भैया के नाम कर दे।

लेकिन बीमारी के बारे में जानने के बाद उनकी परिवार उनकी सहायता नहीं की। और उस वक्त से उनकी परिवार उन्हें अकेले नहीं छोड़ना चाहती है। और बहुत ही मशक्कत के बाद बनारस आ पाई है। उन्होंने अपनी जिंदगी की इंजीनियरिंग की सफर को छोड़ कर के एक गायक बनना चाहती हैं , इसलिए और सिर्फ इसलिए क्योंकि गायक बनना भैया का सपना था। भले ही भैया उनके नाम ना हो सके लेकिन भैया के गुण को अपनाना चाहती थी। वह जीना जाती थी भैया के जीवन को।

इन्हीं सब बातों- बातों में शाम ने भी अपनी मौजूदगी बता दी। उस शाम मैं दीदी के साथ बाजार में गया था। कुछ घर के सामान लेने थे। बाजार से वापस लौटते लौटते काफी रात हो चुकी थी। सूरज तो कबका जा चुका था और उस वक्त चांद अपनी हाजिरी भी लगा चुका था। जब रात के 9:00 बजे तो मैं अपनी बैग और सारा सामान लेकर घर से जा चुका था।


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