Quotes New

Audio

Forum

Read

Contests


Write

Sign in
Wohoo!,
Dear user,
हमदर्द
हमदर्द
★★★★★

© Devendra Singh

Abstract

1 Minutes   1.3K    5


Content Ranking

नहीं है चाहत हमे सजने की

ना हमे संवरना है

क्या होगा रूप सजा के

जब टूट के हमे बिखरना है

नहीं है चाहत हमे धन दौलत की

ना हमे तिजोरी भरना है

क्या होगा धन जुटा के

जब खाली हाथ ही हमे मरना है

नहीं है चाहत हमे हमदर्दी की

ना हमे हमदर्द बनना है

क्या होगा हमदर्दी जता के

जब दूसरे का दर्द ही हमे बनना है !!!

चाहत रूप धन

Rate the content


Originality
Flow
Language
Cover design

Comments

Post

Some text some message..