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शिकार नहीं, तेरा काल हूँ मैं
शिकार नहीं, तेरा काल हूँ मैं
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© Mohit Yadav

Comedy

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देख न! इन घूरती आँखों से
तुझे जन्म देने वाली माँ हूँ मैं ,
तेरी अन्तरात्मा जो चीख रही
सुन! वही तो हूँ न मैं |

छेड़ न! इन कटीली वाणी से
तेरी कलाई का नाज़ हूँ मैं ,
भगिनी बनकर साथ देने वाली
तेरी हँसी की आवाज़ हूँ मैं |

छू न! अशुद्ध हाथों से मुझे
तेरा अंश तेरी बेटी हूँ मैं ,
जिसके सहारे यादें बटोरता था
वही खुशी की पेटी हूँ मैं |

जानवर में भी जान होती है ,
ये न मानने वाला कसाई है तू |
जिसे देख श्वान भी मुँह फेर ले,
मान ले! वही जगहसाई है तू |

गंगा से न पवित्र होने वाला
निष्ठुर पाप है तू |
अपने दूध मे ही ज़हर घोलने वाला
निरमोही साँप है तू |

अब सुन !!
फिर भी तेरी मंशा न बदले तो ,
मुझे बड़ा कदम चलना होगा |
अपने प्रकोपों को धारण करके ,
तेरा दम मसलना होगा |

निहत्था न समझ मुझे ,
एक हाथ में तलवार दूसरे में तख्ती रखती हूँ ,
कमजोर न समझ मुझे ,
तुझे नष्ट करने की शक्ति रखती हूँ |

तुझे भस्म करने वाली ज्वाला हूँ मैं 
तुझे छलनी कर देने वाला भाला हूँ मैं |
तेरे अंत का कारण हूँ ,
तेरी अर्थी पर चढ़ने वाली माला हूँ मैं |

 

महिला अत्यचार ज्वाला

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