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प्रेम-पत्र
प्रेम-पत्र
★★★★★

© Naveen Kumar

Romance

1 Minutes   5.4K    8


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वो साज कहाँ जो सरगम से,

भर दे उन्माद उमंगों का ।

है शब्द कहाँ जो दर्द बने,

इस प्रेम पत्र के छंदों का ।।


दिल को रोका सौ बार कहा,

क्यों बात कहे इन पत्रों से ।

आँखें रिमझिम बरसात बनीं,

बुन "प्रेम-पत्र" इन अधरों से ।।


सियाचिन की मादक मोहक,

ऐ ठंडी-ठंडी हवा बता ।

इस प्रेम-पत्र के माध्यम से,

क्या दर्द कहूँ, कुछ कहाँ पता?


सुन पीली सरसों बात मेरी,

कुछ रंग उधार मुझे दे दो ।

है रूठी प्रियतम दूर देश,

जीवन में उसके रंग भर दो ।।


झिलमिल तारे एक बात कहूँ?

बस यह संदेश उसे दे आ ।

वो उदास, तप्त है शोक व्यथित,

तू जाकर उसका मन भर आ ।।


इस बार अगर हम मिल पाए,

हर दर्द बयां कर जाऊँगा ।

जो प्यार छिपा मन मंदिर में,

प्रियतम तुमको बतला दूंगा ।।


बस एक बार ही जीवन में,

होता है सच्चा प्यार प्रिय ।

कहते हैं सब इस दुनिया में,

यह ईश्वर का वरदान प्रिय ।।


शब्द दर्द हवा रंग

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