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Anuj Tiwari
4 months ago

Very good poem.

4 months ago

Very good poem.


Neeta Kotecha
1 year ago

आम आदमी का अफ़साना कुछ इस कदर है अशीश, कभी कोई ख़्वाब तो कभी कोई ख़्वाब नीलाम होता है। kyaa baat kahi hai..

1 year ago

आम आदमी का अफ़साना कुछ इस कदर है अशीश, कभी कोई ख़्वाब तो कभी कोई ख़्वाब नीलाम होता है। kyaa baat kahi hai..