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हम जात-पात और गोत्र मिलाते मिलते हैं
हम जात-पात और गोत्र मिलाते मिलते हैं
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© Abhishek Rai

Comedy

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संत मेरी नाम के शहर के, खान गली में, हम एक राम मंदिर बनवाते हैं|

सिंघासन पर फिर बैठ, अरे वो क्या कहते हैं, हम secular कहलाते हैं|

हम तो राजनीति के वो बशिन्दे हैं, जो आंख मून्द कर चलते जाते हैं|

सरकार, हम तो वोट का बटन भी surname पद़ कर दबाते हैं|

 

कौन से रंग के फूल मिट्टी का धर्म पूछकर खिलते हैं,

पर हम, हम तो जात पात और गोत्र मिलाते मिलते हैं|

 

मिलने कु दिल मिल गये , मिलने को जहा मिल गये,

पर खुद की शादी तो caste में ही रचाते हैं|

 

राम ने शबरी के झूटे बेर खा लिये,

हम प्यासे को पानी भी जात पूछकर पिलाते हैं|

 

हम धर्म की चादर ओद़कर , अपने खोखले सिद्धांतो से कब हिलते हैं|

हां भाइ , हम तो जात पात और गोत्र मिलाते मिलते हैं|

 

 

हम तो वो हैं, जो महिलाओं  को प्रताड़ीत कर मन्दिरो से दूर भगाते हैं,

फिर दिखावे दिखावे में , मूर्ति बनवाकर उसकी ही पूजा करवाते हैं|

 

हम तो वो हैं, जो गाय को माता बनाकर , इन्सां की किस्मत की रोटी, कुत्तो को खिलाते हैं|

 

हम क्यों नही दिल के दरारो को, दिल की ही अवाज़ो से भरते हैं,

चलो, छोरो , हम तो जात पात और गोत्र मिलाते मिलते हैं||

जातिवादी रूढ़िवादी भारत

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