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दामिनी का दर्द
दामिनी का दर्द
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© Prachi Sharma

Inspirational

1 Minutes   13.6K    3


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क्यों चुप हो श्याम मौन धारण किये ,

क्यों कन्या बिकती हवस के लिए।

क्यों ये दरिंदे मरते नहीं ,

क्यों कन्याएँआज सुरक्षित नही।

क्यों ये आँसू गिरते है,

क्यों जमीर यूँ छिनते है।

ऐ श्याम  सुनो ये करुण पुकार,

अब बन्द करो ये हाहाकार।

दिल रो - रो आँहे भरता है,

ये दामिनी के दर्द को कहता है।

ना बूढ़ी सुखी,ना युवती सुखी,

अरे , आज तो बच्ची भी बिक चुकी।

कब तक चलेगा ये गन्दा खेल,

कब होगा जग में फिर से मेल ।।(2)

This poem is based om rape cases which are increasing day by day in our nation.....

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