Quotes New

Audio

Forum

Read

Contests

Language


Write

Sign in
Wohoo!,
Dear user,
जनवरी
जनवरी
★★★★★

© Dheeraj Dave

Romance

1 Minutes   1.3K    9


Content Ranking

अभी कुछ दिनों पहले ही किसी ने कहा था

के जनवरी के जाड़ें में तुम सेंकती हो धूप

अक्सर अपनी छत पर अकेले टहलती हो

हालाँकि शहर में अब तो आ गया हैं

बारिशों का मौसम, फिर भी

मैंने अपने घर के कैलंडर में रोक रखा हैं जनवरी को

कंपकंपी नहीं होती मगर काँपता हूँ

जलती हुई दोपहर में आ जाता हूँ छत पर

टहलता हूँ बीसियों बार

देखता हूँ तुम्हारी छत को

मैं पागल हूँ,शायद!

तुम तो मुझे जानती भी नहीं हो

बस मैं ही चाहता हूँ तुम्हें

तुम तो मुझे चाहती भी नहीं हो

ये मौसम मेरे मनचाहे क्यूँ बदलेंगे?

आखिर तुम मेरी खातिर छत पर क्यूँ आओगी?

जनवरी घर मौसम

Rate the content


Originality
Flow
Language
Cover design

Comments

Post

Some text some message..