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उड़ान
उड़ान
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© Alok Rai

Comedy

1 Minutes   6.9K    7


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वक़्त दौर हो या हालात कोई वक़्फ़ जीत हो या मात कोई,

सर उठा तुम हमेशा चलना, दे न दे साथ कोई

कल तक तुमने कितने अत्याचार सहे,

अनगिनत आंसू उस चौखट पर बहे,

कहीं दहेज़ के लिए किसी ने गला घोंटा ।

किसी ने गर्भ में लड़की है ये सुन किया दिल छोटा ।

कहीं सड़को पर मर्यादा तार तार हुई

हर चौराहे पर इंसानियत शर्मशार हुई ।

फिर भी ए नारी ! तूने जीवन को संचार दिया ।

कभी माँ, कभी बहन तो कभी संगिनी बन रिश्तों को नया आधार दिया ।

लौटा न सकेगा ज़माना हाँ तुमने इतना प्यार दिया ।

वादा करते हैं हम तेरे परो को इक नया आसमान देंगे,

जी सके तू खुल के ऐसा भयमुक्त जहां देंगे ।

तेरे पंखो को इक नयी उड़ान देंगे ।

तेरे पंखो को इक नयी उड़ान देंगे ।।

 

तेरे पंखो को इक नयी उड़ान देंगे

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