Audio

Forum

Read

Contests

Language


Write

Sign in
Wohoo!,
Dear user,
आज फिर कुछ यूँही ...
आज फिर कुछ यूँही ...
★★★★★

© Meera Srivastava

Inspirational Abstract

1 Minutes   6.9K    10


Content Ranking

आज फिर कुछ यूँही ...

आज न जाने क्यों उसने

पूछ ही लिया -इतनी चुप्प !

आखिर क्यों रहती हो तुम ?

मैं एकबारगी अचकचा सी गई

ऐसे बेतुके, अजीब से सवाल से

डर भी गई ..थोड़ा कम ही सही

मेरी चुप्पी ने क्या इसे भी ,

कर लिया अपने दायरे के भीतर ?

फिर हँसते -हँसते कहा ,चुप्प ?

नहीं तो ,बोलती तो हूँ इतना !

चुपचाप ही कहा -तुम चुप रहो ,

तब तो सुनोगे मेरा बोलना !

और ....चुप हो गई ......

चुप अजीब दायरा

Rate the content


Originality
Flow
Language
Cover design

Comments

Post

Some text some message..