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स्कूल बैग का भार
स्कूल बैग का भार
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© Vivek Verma

Children

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देखो! आज बच्चों के बस्ते कितने भारी हैं,

लादना पड़ता पीठ पर कितना ये भारी है।

देखो! सब कितना बड़ा हो रहा है ये अन्याय,

मासूम बच्चे पिस रहे भार तले कहाँ हो रहा है न्याय?


सच में कभी-कभी तो कंधे तक छिल जाते हैं,

होता कभी दर्द इतना ये नन्हे सह नहीं पाते हैं।

बिल्कुल हिम्मत ये हार जाते,

पर बेबस हैं कुछ कर नहीं पाते।


चलो! चल कर किसी दिन समझायें प्यारे,

ये झूठी तसल्ली ही देते अभिभावक बेचारे।

बस अब तो कुछ ठोस काम करना पड़ेगा,

बस्तों का बोझ अब तो कम करना पड़ेगा।


बदलनी पड़ेगी शिक्षा की ये कठिन नीति सारी,

जो पड़ रही है हमारे नन्हे-नन्हे बच्चों पर भारी।

पीठ अन्याय बच्चे

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