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परिंदे का ईमान : गज़ल
परिंदे का ईमान : गज़ल
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© Neeraj Kumar

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मैं परिंदा हूँ मेरा ईमान न पूछो,

क्या हूँ, हिन्दू या कि मुसलमान न पूछो। 

 

चर्च, मंदिर, मस्जिदें सब एक बराबर

रहता किसमें है मिरा भगवान न पूछो। 

 

मज़हबी उन्माद में जो मर गया वो था

एक जिंदा आदमी, पहचान न पूछो।

 

पीठ में घोपा हुआ है नफरती खंजर

रोता क्यों है अपना हिंदुस्तान न पूछो।

 

आलम-ए-बेचैनियाँ हर सिम्त हैं फैली

हर गली हरसू क्यों है वीरान न पूछो ।

 

खूब काटी है फसल अहले सियासत ने

खाद बन, किसने गँवाईं जान न पूछो ।

 

भाई मारा जाता है जब, भाई के हाथों

होती कितनी ये जमीं हैरान न पूछो ।

 

#gazal #hindi #hindu #musalman #mandir #masjid #hindustan #love #politics

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