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बुलबुले
बुलबुले
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© Neha Noopur

Tragedy

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पानी के बुलबुले

बनते हैं फूलते हैं

और फूट जाते हैं !

हाथों में रह जाती है बस उनके अंदर की हवा 

पर कहाँ? वो भी तो उड़ जाती है

खो जाती इन वादियों में !

बिलकुल वैसी ही होती हैं, हमारी इच्छाएं 

जिनका कोई अंत नहीं … 

बनती हैं फूलती हैं और टूट जाती है !

दिल में बच जाती है बस उनके टूटने की कसक

पर वो खोती नहीं , रह जाती है -

ज़ख़्म बनकर दिल की गहराइयों में !

और … जब कभी

बुलबुले के भीतर की खोई हुई हवा 

सहलाती है उन जख्मों को ,

तो

रो पड़ता है मन सुखी पपड़ियों के दर्द से ,

और याद करता है उन बुलबुलों को जो फुट गए हैं...

ज़ख्म याद इच्छा

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