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पर्यावरण मेरा अस्तित्व
पर्यावरण मेरा अस्तित्व
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© Shailaja Bhattad

Drama

1 Minutes   7.0K    6


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पवन का शोर घटाएँ घनघोर।

प्रकृति का ये विकराल रौब।

नदियों की अविरलता में रोक।

झरनों के कलरव पर लगी रोक।

झीलों,तालों पर बंद हुआ शोर।

दे रहा है त्राण मुसलसल अलामत मिली पुरजोर।

नींद से नहीं जागा फिर भी ,थामे है किसकी डोर।

है सैलाब पोशिदा अभी दिखेंगे इस्तराब में जल्द ही सभी।


मनोबल है कि डगमगाता नहीं, चेतना है कि जागती नहीं।

सरकशी का है ये आलम कि ठग रहें हैं खुद को ही।

ये मंज़र संभाल लो भविष्य असुरिक्षत है ये सभी जान लो।


वक्त दे रहा है दस्तक बार-बार हरबार।

बन अर्षद सतरंगियों को यतरंगी बनना है।

कोई मोज़दा हो ऐसी इफ़्तेदा अब करना है।।

Nature River Life

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