Audio

Forum

Read

Contests

Language


Write

Sign in
Wohoo!,
Dear user,
बरखा!
बरखा!
★★★★★

© Preeti Praveen

Others

1 Minutes   6.8K    8


Content Ranking

ख़ाली तुम मत रखना झोली

प्यासी आज धरा ये बोली

इन्द्र ने ख़ुद पे नाज़ किया

तब बरखा का आग़ाज़ किया 

बूँदों से है छटा निराली

सौंधी ख़ुशबू है मतवाली

डाली डाली पंछी चहके

ऋतुराज का दिल भी बहके

मस्त पवन ने आज पुकारा

बरखा का है रूप निखारा

रंग बिरंगी छतरी संग भीगे

काग़ज़ की कश्ती संग भीगे

झूमे कुछ इठलाकर भीगे

मस्ती में बलखाकर भीगे

बच्चे बूढ़े-जन भी भीगे

थोड़ा अहसासों संग जी लें

कुछ तो मस्त पलों संग जी लें।।

      

 

 

Rain

Rate the content


Originality
Flow
Language
Cover design

Comments

Post

Some text some message..