Audio

Forum

Read

Contests

Language


Write

Sign in
Wohoo!,
Dear user,
 वृक्षारोपण
वृक्षारोपण
★★★★★

© Alka Agarwal

Others

1 Minutes   13.7K    11


Content Ranking

 

मेरी खुशियों की खातिर क्यों वृक्षों का यौवन रोता है

मेरे दहन की खातिर क्यों वृक्षों का दोहन होता है

मुझको तो मारा काल ने वृक्ष मरे बिन काल के 

यूं तो पड़ जायेगा अकाल आने वाले काल में

मेरे मोक्ष की खातिर क्यों वृक्षों का शोषण होता है

मेरी खुशियों की खातिर क्यों वृक्षों का यौवन रोता है

 

मैने तो जीते जी भी कितने वृक्षों को मारा है

अपने सुख की खातिर इनको मौत के घाट उतारा है

मेरे मोक्ष की खातिर क्यों वृक्षों का शोषण होता है

मेरी खुशियों की खातिर क्यों वृक्षों का यौवन रोता है

 

मैं तो बस लेता ही आया प्रकृति से उपहारों को 

मेरी संतानें हैं संकट में चलो चुकाऊँ उधारों को 

चीख चीख कर वृक्ष कहे क्यों नहीं मेरा रोपण होता है

मेरी खुशियों की खातिर क्यों वृक्षों का यौवन रोता है

 

इनको ना तुम नश्वर जानो

स्वयं में इनको ईश्वर मानो

सर्व धर्म हो कर के एक 

अब अपने अंतर में झांको

हो नर तो कहो 

अब वृक्षारोपण होता है

अब वृक्षारोपण होता है

 

पेड़ प्रकृति

Rate the content


Originality
Flow
Language
Cover design

Comments

Post

Some text some message..