Quotes New

Audio

Forum

Read

Contests


Write

Sign in
Wohoo!,
Dear user,
अर्पण कुमार की कविता 'बड़ा बेटा'
अर्पण कुमार की कविता 'बड़ा बेटा'
★★★★★

© Arpan Kumar

Others

1 Minutes   13.5K    2


Content Ranking

बड़ा बेटा

अर्पण कुमार

 

वृद्ध होती

दो जोड़ी आँखों की चमक

असमय फ़ीकी न पड़े

बदरंग और मामूली से चेहरों पर

जीवन के उत्तरार्ध में

आ जाऐ

थोड़ा रंग

थोड़ी विशिष्टता...

बड़े बेटे के सपने

किसी परकटे पक्षी की भाँति

घर की मुंडेर नहीं लाँघते

हठीला कोई सपना

सिर धुनता है जब

नींद घबराकर उठ बैठती है

........

घर की अपेक्षा और अपने सपनों की उड़ान के बीच का द्वंद्व!

Rate the content


Originality
Flow
Language
Cover design

Comments

Post

Some text some message..