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खुद से प्रीत लगा ले
खुद से प्रीत लगा ले
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© Yogesh Suhagwati Goyal

Drama Inspirational

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चिंता को तू कर दे टाटा, मन में अलख जगा ले,

खुद-सा साथी नहीं मिलेगा, खुद से प्रीत लगा ले ।


जब चलना नहीं सीखा था, गोद में लोग उठाते,

जबसे हमने चलना सीखा, कदम-कदम पर गिराते ।

उठना चलना गिरना, खुद को फिर से उठा ले,

गिरने को तू कर दे टाटा, खुद से प्रीत लगा ले ।


चुप रह कर बर्दाश्त करें तो, रहते सबके प्यारे,

अगर हकीकत बयां करें तो, कर देते सब न्यारे ।

दुनिया का दस्तूर यही है, जुबां पे ताला लगा ले,

या दस्तूर को करदे टाटा, खुद से प्रीत लगा ले ।


अजब जिंदगी कभी हंसाये, और कभी रुलाये,

रहते जो हर हाल में खुश, उनसे हाथ मिलाये ।

जो नसीब है उसे मान के, प्यार से गले लगा ले,

या नसीब को करदे टाटा, खुद से प्रीत लगा ले ।


कोई आगे कोई पीछे, सभी के मन में समाया,

कभी धूप है कभी छाँव, कोई समझ ना पाया ।

जल्दी है ना देर से कोई, मन को ये समझा ले,

शिकवों को कर दे टाटा, खुद से प्रीत लगा ले ।


पक्षियों का कलरव सुन, ताल से ताल मिला ले,

चार दीवारी से निकल, कुदरत से प्रीत बढ़ा ले ।

सर्दी गर्मी पतझड़ बारिश, आयेंगे और जायेंगे,

छोड़ बहाना उम्र का, ‘योगी’ को मीत बना ले ।


चिंता को तू कर दे टाटा, मन में अलख जगा ले,

खुद सा साथी नहीं मिलेगा, खुद से प्रीत लगा ले ।

Poem Love Self Life Joruney

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