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Ramson Vyas
1 month ago

बढ़िया.

1 month ago

बढ़िया.


Anil Sharma
1 month ago

wow nice...

1 month ago

wow nice...


Twinkle Arora
4 months ago

perfect poem. Well done Divik Ramesh

4 months ago

perfect poem. Well done Divik Ramesh


Kanta Roy
1 year ago

पर देखा है मैंने एक ऎसा भी हल्का जहाँ कठिन होता था आवाज़ का अर्थ लगाना। वह हलका था मेरी माँ की हथेलियों का या उन हथेलियों का जो आज भी फैलाती हैं रोटियाँ हथेलियों की थाप से।.............बेहद गहरी अनुभूतियाँ जागती है आपकी रचनाओं से ...बेहतरीन

1 year ago

पर देखा है मैंने एक ऎसा भी हल्का जहाँ कठिन होता था आवाज़ का अर्थ लगाना। वह हलका था मेरी माँ की हथेलियों का या उन हथेलियों का जो आज भी फैलाती हैं रोटियाँ हथेलियों की थाप से।.............बेहद गहरी अनुभूतियाँ जागती है आपकी रचनाओं से ...बेहतरीन