Quotes New

Audio

Forum

Read

Contests


Write

Sign in
Wohoo!,
Dear user,
बात कितनी गहरी है
बात कितनी गहरी है
★★★★★

© परेश पवार 'शिव'

Romance

1 Minutes   321    1


Content Ranking

सुना है महकती है तन्हाई भी वहॉं

जब सीने पे उसके तुम सर रखे सोती हो

और यहाँ एक मैं हूँ

मेरी तनहाई है

ये क़लम है, काग़ज़ है


उस पे कुछ आधे अधुरे-से नग़में हैं

और लिखावट को धुँधली बनाती कुछ बूँदें

कुछ काग़ज़ पे बिखरी हैं

कुछ पलकों पे ठहरी हैं


अब क्या बतायें तुम्हें के बात कितनी गहरी है!

कुछ तुम याद करते हो हमें

कुछ हम भूल ना पाये हैं

दिल के ऑंगन में धूप बेशक सुनहरी है..

पर क्या बताये तुम्हें के बात कितनी गहरी है!


दिल कलम कागज़

Rate the content


Originality
Flow
Language
Cover design

Comments

Post

Some text some message..