Audio

Forum

Read

Contests

Language


Write

Sign in
Wohoo!,
Dear user,
कोल्हू का बैल
कोल्हू का बैल
★★★★★

© Rashi Singh

Others

1 Minutes   1.3K    5


Content Ranking

कोल्हू के बैल सा 
दिन -रात चलता है
चूल्हा पडा है ठंडा
खुद सुलगता है
'फांको 'की आ गयी नौवत
बंद हैं 'चखिया' के पट!
रात -दिन गेहूँ सा
खुद ही पिसता है
ओढकर चेहरे पर 
कागजी हँसी
अन्दर है अरमानो की
होली जली 
दुनिया के रूठने से डरता है 
दुख -सुख के बीच की 
कड़ी बन 
बीच में ही डोलता है
कोल्हू के बैल सा
दिन रात चलता है! 

ज़िन्दगी भागमभाग दौड़

Rate the content


Originality
Flow
Language
Cover design

Comments

Post

Some text some message..