Audio

Forum

Read

Contests

Language


Write

Sign in
Wohoo!,
Dear user,
इन्तजार मे आँखे
इन्तजार मे आँखे
★★★★★

© Anantram Choubey

Others

1 Minutes   6.5K    3


Content Ranking

पोते के इन्तजार मे
दादी बार बार बूढ़ी 
आँखो मे चश्मा
लगाकर देखती है
दरवाजे की तरफ
बार बार नजर जाती है
पोता आफिस से अभी
वापिस नही आया था
घबराहट बैचेनी से
दिल भर आया था
बस उसके इन्तजार
मे डर और भय से
मन ही मन मे
काँप जाती है
जब बेटे बहू की
याद आ जाती है
बहुत ही दुःखी होती है
दस साल पहले जब
कार दुर्घटना हुई है
बेटे बहू की मौत हो गई
हाँ पोते की जान बच गई
बस ईश्वर की अजीव
बिचित्र ही माया थी
बहुत दुःखी हुई रोई
पर भगवान की
माया कुछ समझ
मे नही आई
दो की मौत एक
की जिन्दगी बचाई
बहुत बडे दुःख  मे
एक छोटी सी
खुशी भी पाई
नियति की बडी
अजीव ही लीला है
पप्रकर्ति ने हर किसी
के साथ खेल खेला है
पोते की जान बचाकर
मन को कुछ तो
राहत पहुँचाई है 
उसी पोते के इन्तजार
मे बूढ़ी दादी परेशान है
क्यों  कि पोते की जान
मे दादी की जान है ।

 

कविता माया मोह

Rate the content


Originality
Flow
Language
Cover design

Comments

Post

Some text some message..