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मेरा निधन
मेरा निधन
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© Saurabh Kumar

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सहा हरदम मैंने बातों को

नहीं उठाया कभी इन हाथों को

स्वीकार लिया जब मैंने उसके

दिए गए कीमती चाँटो को

इसलिए मेरा निधन हो गया।

मैंने बनाया उनके ऊँचे मकान को

मैंने सजाया उनके चमकते दुकानों को

चलते रहे हम उनके अनुसार 

खोले नहीं कभी अपने जुबान को

इसलिए मेरा निधन हो गया।

चाहा जब मैंने अपना घर बसाने को

चाहा जब अपना दुख मिटाने को

दबे रह गए मेरे अरमान जब

वो कहे अपने चमचे से मुझे ठुकराने को

इसलिए मेरा निधन हो गया।

तोड़ा मैंने हाथों से बड़े बड़े चट्टानों को

झेला मैंने सागर में आने वाले तूफान को

वो नहीं किए, गुज़ारिश हमारी पूरी

देना चाहा जब मैं अपने बेटे के मुस्कान को

इसलिए मेरा निधन हो गया।

    

आरमान जुबान मुस्कान

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