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मौसम
मौसम
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© Anushree Goswami

Drama Inspirational

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मौसम,

बदलते रहते हैं,

कल पतझड़ थी, आज हरियाली है,

मैंने देखा है प्रकृति को,

बदलते हुए अपनी पहचान,

इस कारण होता नहीं उसमें,

गुरूर अपनी खूबसूरती का !


प्रकृति ने भी सीखा है, माना है,

दूसरों के लिए जीने को अपना पहला धर्म,

हम करते हैं प्रकृति की उलाहना -

कहकर सब पराये हैं,

उसने तो माना है,

हम सभी को अपना।


काश !

हम सब भी समझ पाते,

प्रकृति ने हमें बनाया है,

तो हमने भी प्रकृति को संवारा है,

अपने लिए यहाँ कोई नहीं जीता,

स्वार्थी होना -

प्रकृति में नहीं,

इंसान की !

Nature Human Selfish

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