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Saurabh Sharma
1 month ago

अच्छी

1 month ago

अच्छी


Narendra Singh
1 year ago

बहुत ही ख़ूबसूरत कविता...

1 year ago

बहुत ही ख़ूबसूरत कविता...


hemant kumar
1 year ago

सच औरत पूरा जीवन घर के कमरों सा ही बंटती रहती है ---जिस कमरे में जाती है उसी की तरह ढल जाती है ----सिर्फ दूसरों ---अपनों की ख़ुशी के लिए----बेहतरीन कविता ---शेफाली जी को हार्दिक शुभकामनायें.--डा ० हेमंत कुमार

1 year ago

सच औरत पूरा जीवन घर के कमरों सा ही बंटती रहती है ---जिस कमरे में जाती है उसी की तरह ढल जाती है ----सिर्फ दूसरों ---अपनों की ख़ुशी के लिए----बेहतरीन कविता ---शेफाली जी को हार्दिक शुभकामनायें.--डा ० हेमंत कुमार