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या लकुटी अरु कामरिया
या लकुटी अरु कामरिया
★★★★★

© Raskhan Kavya

Classics

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या लकुटी अरु कामरिया पर, राज तिहूँ पुर को तजि डारौं।

आठहुँ सिद्धि, नवों निधि को सुख, नंद की धेनु चराय बिसारौं॥

रसखान कबौं इन आँखिन सों, ब्रज के बन बाग तड़ाग निहारौं।

कोटिक हू कलधौत के धाम, करील के कुंजन ऊपर वारौं

उत्कृष्ट रचना रसखान या लकुटी अरु कामरिया

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