Mani Aggarwal

Drama


Mani Aggarwal

Drama


शिक्षा बनी व्यापार

शिक्षा बनी व्यापार

1 min 543 1 min 543

व्यवसाय अब हो गया,

 शिक्षा का आधार।

अभिभावक सब झेल रहे,

इसकी भारी मार।


सुरसा मुख सी बढ़ रहीं,

स्कूलों की फीस। 

भर-भर कर बेहाल जनक,

हृदय में उठती टीस।


बिना पढ़ों का दौर अब, 

रहा नहीं है भाई।

पर जी का जंजाल हुई,

बच्चों की पढ़ाई।


खून-पसीना एक कर,

जोड़ें पाई-पाई।

स्कूलों के पेट में,

सारी गई समाई।


भारी पहले न लगती थी,

 दस बच्चो की पढ़ाई।

दो बच्चों की शिक्षा नें अब,

माँ-बाप की नींद उड़ाई।


काश ! योजना ऐसी कोई,

ले आए सरकार।

तालों में अब बंद हो,

स्कूली व्यापार।


Rate this content
Originality
Flow
Language
Cover Design