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मन
मन
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© Raman Sharma

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अरे ओ ! मन , कुछ तो सुन
दौड़ता रहता है हर पल ,
कुछ तो सुन .....
आँखें पलकें झपकती हैं
निकल पड़ता है सफ़र पर ,
कभी दिखाता सुंदर ख़्वाब
तो कभी आफत भरे ख़्वाब ,
कुछ तो सुन .......
होती प्रभात खिलते हैँ सुमन 
महफ़िल तेरी पूरी तरह ख़ामोश ,
वक़्त बदलता अपना पहर
बदलता है तू अपना विचार ,
कुछ तो सुन .......
कहाँ है तेरा पड़ाव 
करता है जहाँ विराम ,
कभी रुठता है जैसे 
मुरझाया सा कोई फूल ,
कुछ तो सुन ......
ढूँढता है हर तरफ उजाला
रहता बेचैन नहीं मिले नज़ारा ,
ना जाने कैसा है तेरा मिज़ाज
हो चुका हूँ तुमसे अनजान ,

raman sharma

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