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मैं ख़ुश हूँ !!!
मैं ख़ुश हूँ !!!
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© Adhiraj Jain

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एक बार एक कमाल की बात हुई
एक बार अपने आप से बात हुई
कई दिनों बाद किसी ने ख़्याल पूछा था
कई दिनों बाद मैंने किसी का हाल पूछा था
मैंने कहा भाई कैसे हो
मैंने जवाब दिया मैं ख़ुश हूँ
लेकिन कहीं कुछ गड़बड़ लग रही थी
मेरी आवाज़ में उदासी दिख रही थी
तो बन गया मैं कर्मचंद और पड़ गया पीछे
मैंने कहा कि भाई कुछ छुपा रहे हो तुम
आधा अधूरा सा हाल बता रहे हो तुम
मैंने जवाब दिया कि ऐसा नहीं है
लगता है तुम्हें ग़लतफ़हमी हुई है
तो फिर वो पहले वाली हँसी कहाँ गई
वो ख़ुशी, वो बेपरवाही कहाँ गई
अरे भाई वक्त के साथ थोड़ा तो बदलूँगा ना मैं
थोड़ा गंभीर, थोड़ा समझदार बनूँगा मैं
बस इसलिए तुम्हें कुछ अलग लगता है
यूँही तुम्हें दाल में कुछ काला दिखता है
दाल यूँही कभी काली नहीं दिखती
एक हाथ से कभी ताली नहीं बजती
मैंने कहा, कोई तो बात है जो सता रही है तुम्हें
कोई तो राज़ है, जो नहीं बता रहे हो हमें
मैं सोचने लगा कि मुझे क्या जवाब दूँ मैं
कैसे इस चिपकू से पीछा छुड़ाऊँ मैं
मैंने फिर कहा, मैं ख़ुश हूँ, मेरा यक़ीन मानो
मुझे तुम ग़म की इस दुनिया का हकीम मानो
लोगों की बेवफाइयों से मुझे फ़र्क़ नहीं पड़ता
उनकी बेइमानियों से मेरा दिमाग़ नहीं सड़ता
मुझे चिंता नहीं बड़ते गुनाहों की
मुझे चिंता नहीं बड़ती नफ़रतों की
मुझे घटते प्यार की कोई परवाह नहीं
मुझे मरती इंसानियत की परवाह नहीं
दंगों की आग से मुझे मतलब नहीं
बेगुनाहों के खून से मुझे मतलब नहीं
मुझे क्या लेना देना आतंकवाद से
मेरा कोई रिश्ता नहीं कट्टरवाद से
ग़रीब भूखे पेट सोया, तो मैं क्या करूँ
उसका बच्चा रोया, तो मैं क्या करूँ
मुझे दुख नहीं सड़क पर सोते लोगों का
मुझे दुख नहीं सड़क पर मरते लोगों का
कोई बाढ़ में डूब कर मर गया, मुझे क्या
कोई लू की चपेट में गुज़र गया, मुझे क्या
किसी को ठंड ने निगल लिया, मुझे क्या
किसी को सूखा पचा गया, मुझे क्या
अमीर और अमीर हो रहा तो होने दो,
ग़रीबी न मिटे, तो ग़रीब को मिटा दो
बाप को वृद्धाश्रम भेजो, माँ को भी निकालो
मुझे क्या करना, तुम्हारा घर, तुम संभालो
मुझे फ़िक्र नहीं, ख़ूनी के आज़ाद घूमने की
मुझे फ़िक्र नहीं बलात्कारी के चुनाव जीतने की
मुझे ग़म नहीं कि मेरा नेता चोर है
मुझे गम नहीं कि हर कोई रिश्वतख़ोर है
जिसे जितना खाना है खाता जाए
जिससे जितना पचे, पचाता जाए
किसी को 2जी का 3जी करना है, करने दो
किसी को कोयला काला करना है, करने दो
कोई झूटे वादे करता है तो करे, उसका मन
कोई सौ चूहे खाकर हज को चले, उसका मन
मंदिर-मस्जिद गिरानी है गिराओ, मैं क्यूँ बोलूँ
प्यार में भी जिहाद घुसाओ , मैं क्यूँ बोलूँ
किसी की मौत से मुझे कुछ लेना देना नहीं
यकीन मानिए व्यापम से मुझे प्रॉबलम नहीं
झूठ को सच बनाने के खेल ने मुझे दुखी न किया
झूठों के इस मेलम-मेल ने मुझे दुखी न किया
और भाई ये बताओ कि मैं क्यूँ दुखी होऊँ
मैं क्यूँ दूसरों के गम को अपने सर लेके रोऊं
मेरी तो जिंदगी बढ़िया चल रही है
रूखी-सूखी सही, दो वक्त की रोटी मिल रही है
मुझे क्या लेना देना समाज की बुराइयों से
कम से कम पानी पी तो रहा हूँ टूटी सुराइयों से
मैं तो आम आदमी हूँ, लड़ना मेरा काम नहीं
रावण का वध मैं क्यूँ करूं, राम मेरा नाम नहीं
मैं तो अपनी जिंदगी में खोया हुआ हूँ
बहुत गहरी नींद में सोया हुआ हूँ
मुझे क्यूँ परेशान करते हो मुझसे मेरा ग़म पूछकर
मेरे पीछे पड़े हो तुम, ना जाने क्या सोचकर
मुझे बक्श दो भाई, किसी ओर को पकड़ो
अपनी सूखी आँखों से किसी और को जकड़ो
मुझे जाने दो मैं तुम्हारे हाथ जोड़ता हूँ
बोलो तो सबके सामने पैर पकड़ता हूँ
मैंने अपने आप से बात करने की ग़लती की
इस बार माफ़ कर दो अगली बार नहीं होगी
मेरी गुहार सुनकर मुझे मुझपर तरस आ गया
मेरी बातें सुनकर मेरी आँखों में पानी आ गया
मैंने मुझसे कहा, कि अब ये सवाल नही करूँगा
तुम्हें ऐसी बातों से और परेशान नहीं करूँगा
मैं समझ गया हूँ चेहरे से ग़ायब ख़ुशी का सबब
मैं समझ गया हूँ गमगीन आँखों का मज़हब
मुझे मेरे सवालों के जवाब मिल गए
वक्त के पन्नों के फटे हुए सिरे सिल गए
बस एक गुज़ारिश है तुमसे मना मत करना
मैं तुम्हारा पीछा नहीं छोड़ूँगा वरना
मैंने मुझसे कहा कि माँग ले जो माँगना है
बस जान नहीं दूँगा, अभी और भागना है
जान नहीं, सिर्फ़ तुमसे एक वादा चाहिए
एक राज़ को राज़ रखने का इरादा चाहिए
मैंने कहा कि इसमें क्या बड़ी बात है, राज़ बोलो
जल्दी से इस तिजोरी का ताला तोड़ो
लेकिन मैं मेरा मुझसे जवाब सुनके दंग हो गया
बहुत देर के लिए मैं चुप हो गया
जवाब में मुझे ख़ामोश रहने की सलाह मिली थी
एक बार फिर सच्ची आँखों से नज़र मिली थी
मैं समझ गया किसी से ये बातें नहीं करनी हैं
इन बातों के लिए किसी के पास वक्त नहीं है
इन बातों के चक्कर में बहुत मार खाऊँगा
इन जस्बातों के चक्कर में जान से जाऊँगा
बस तबसे सबसे यही कहता हूँ कि मैं ख़ुश हूँ
मुझे किसी का ग़म नहीं, मैं सचमुच ख़ुश हूँ
मैं सचमुच बहुत ख़ुश हूँ।।

ख़ुश कर्मचंद गुनाहों नफ़रतों बेगुनाहों आतंकवाद कट्टरवाद ग़रीबी ख़ूनी आज़ाद बलात्कारी चुनाव मंदिर-मस्जिद जिहाद व्यापम रावण राम

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