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नया साल
नया साल
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© Meenakshi Mathur

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"लो आ गया फिर एक साल" लो आ गया फिर एक साल,लो बीत गया फिर एक साल। कुछ खोया कुछ पाया हमने इस दौरान। खोने का तू गम न कर,पाने का तू दम्भ न भर। जो तेरा था तूने पा लिया,जो न था वो चला गया। कैसे पाया कैसे खोया इस उधेड़बुन में पड़ना है बेकार, साम,दा, दंड भेद से चलता ये संसार। कितना पाया कितना खोया नापतौल है बेकार, बिना तराजू तुलता ये संसार। पाने वाला हँसता रहा,खोने वाला रोता रहा, किसको किसकी है फ़िक्र यहाँ, एकदूजे से बेगाना रहा। जिसने खेला खेल दिमाग से ऊँची उड़ान वो भरता रहा। दिल से खेला जिसने भी वो मुश्किलों में भी आगे बढ़ता रहा। फिर से वही सब दोहराने को फिर से आया एक और साल। फिर से होंगी बातें बड़ी बड़ी,भूल के अगला पिछला साल। आशाओं के दीप जलेंगे,सपनों के फिर महल बनेंगे। दिल दिमाग दोनों दौड़ेंगे,शतरंज के पासे फिर घर बदलेंगे। सूरज की किरणों के संग जीवन फिर से करवट बदलेगा। सुख भी होगा दुःख भी होगा,प्यार के संग शिकवा भी होगा। हम भी होंगे आप भी होंगे,किन्तु समय दो कदम आगे होगा।

नया सपने दिल दिमाग

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