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तकलीफ है कुछ और दिनों की
तकलीफ है कुछ और दिनों की
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© Hasmukh Amathalal

Drama

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 नहीं, ये महायुद्ध है

हंगामी है ये वाकयुद्ध

इसकी कोई जरुरत नहीं

देश में किसी को सुनने की फुर्सत नहीं।

 

अर्जुन को श्रीकृष्ण उपदेश दे रहे हैं

देख लोग तुझे आशीर्वाद दे रहे हैं

तकलीफ में तो हैं फिर भी आह नहीं करते

देश के लिए आज वो कुछ भी करते।

 

नहीं दिए जवानों को वो अस्त्रशस्त्र

खाते रहे धन दोनों हाथों से और फ़ौज रही निःशस्त्र

अच्छा हुआ कोई दूसरा कारगिल नहीं हुआ

देश को और धक्का नहीं पहुँचा।

 

देश का सौभाग्य है

और दुश्मन का दुर्भाग्य है

सही समय पर ललकारा है

जवाब हमें भी देना करारा है।

 

बाहरी दुश्मन तो खदेड़े जा सकते हैं

भीतरी दुश्मनो को मात देना जरुरी है

पैसे दे देकर देश को खोखला कर दिया है

कालाधन देश को तोड़ने में लगा दिया है।

 

देश के हर कोने में जयचन्द भरे पड़े हैं

देश के कुछ ही प्रहरी हौसला लिए खड़े हैं

दिक्कत तो है लेकिन जनता समझदार है

देश के उत्थान में वो बराबर की भागीदार है।

 

बस थोड़ा सा सब्र कुछ दिन ओर

ना करना कोई नुकसान या हो जाना निशाचर

देश को जरुरत है अभी शांति और खेवना की

ना आना भ्रान्ति में तकलीफ है कुछ और दिनों की।

 

 

तकलीफ कुछ

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