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प्रेम व्यथा
प्रेम व्यथा
★★★★★

© Ashish Kumar Yadav

Romance

1 Minutes   7.1K    6


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समझों न तुम इसे कथा-कहानी,

ये है मेरी प्रेम व्यथा पुरानी|

मैं बनके खुद श्याम,

चाहता हूँ तुम्हें राधा बनाना|

पर तुम बनके रत्नावली,

क्या चाहती मुझसे मानस रचाना|

तुलसी को हैं राम प्रिय,

सूर को हैं घनश्याम प्रिय,

पर तुमको छोड़ ये धरा है जानती,

तुम ही हो मेरा संसार प्रिये|

माना कर दी मैंने भूल बड़ी है,

पर उसकी मुझको मिली सजा है

पर शायद एक तरफा प्रेम का,

अपना ही एक अलग मज़ा है|

ये मज़ा भी है, ये सज़ा भी है,

ये तड़प भी है, ये लगन भी है,

कुछ भी करके तुमको अपना बनानें की,

खायी फिर मैंने कसम भी है|

आखिर तक ये कसम मैं पूरी निभाऊंगा,

तुम अगर नहीं मानी तो,

बनके मजनू मैं भी मर जाऊंगा |

प्रेम हम-तुम हिंदी

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