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कबीर
कबीर
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© Anantram Choubey

Drama

1 Minutes   7.1K    6


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कबीरा खड़ा

बाजार मे माँगे

सबकी खैर ।

नही किसी

से दोस्ती नही

किसी से बैर ।।

मतलब के

सब यार है ।

बिना मीत

चाहत नही

ये आज का

ये संसार है ।


कलयुग की

बलियारी है ।

पैसों की

मारामारी है ।

पैसो के

सब रिश्ते है ।

आपस मे

लड़ते झगड़ते है ।

बाप भला न भैया

सबसे बड़ा रूपैया ।


आपस मे

पहचान नही है ।

दीन धर्म करम

ईमान नही है ।

इन्सानो का

जन्म लिया है।

इन्सानो का

काम नही है ।


कह गये

दास कबीर है

क्या सच्चा कोई

इन्सान नही है ।


Kabir Life Philosophy

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