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जुदाई / विरह
जुदाई / विरह
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© kishor zote

Fantasy

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तेरी याद आये
सारी रात्र जागा
नींद नहीं आती
प्रेमाचा हा वांधा...

कहते हमको
पागल हा झाला
कहता उनको
प्रेम रोग झाला...

तुम दूर अब
राहू नको आता
आवो पास अब
स्पर्श तुझा हवा...

कटती ही नही
रात्र वैरी अशी
साथ दे दो तुम
धुंद त्या सुखाची...

कैसी ये जुदाई
जीव कासावीस
दुल्हन बनके
संपव विरह...

 

कविता

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