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और फिर बचे रहना
और फिर बचे रहना
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© Dipak Mashal

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ख़बर है फिर धुलेगी धरती 
 
फिर बुहारा जाऐगा इसे 
 
समेटकर अनावश्यक कूड़ा 
 
विलुप्ति के कूड़ेदान में फेंका जाएगा 
 
कहा विज्ञान ने 
 
फिर घटित होगा डायनासोरों का इतिहास 
 
बीतेगा फिर किसी आर्किऑप्टेरिक्स का नाम 
 
बदलती धरती से 
 
फिर रीतेंगीं साइबेरियन चीतों सी प्रजातियाँ 
 
फिर कुछ महामगरमच्छ गायब होंगे देखते ही देखते 
 
कोनिफर्स भी गुमशुदा होंगे 
 
फिर अपना स्वरुप खो देंगे कुछ
 
साइकेडिओइड्स फर्न जिन्को 
 
बदलाव की आँधी में बचे रहेंगे योग्यतम ही 
 
जिनमें नहीं होगा नाम लालची प्रजाति का 
 
जबकि मुस्कुराता रहेगा चाँद 
 
सूरज हो सकेगा और भी गुस्सैल 
 
आँखे मलते मिचमिचाते रहेंगे तारे 
 
सुन-पढ़-गुन लेना इसे 
 
और फिर बचे रहना 
 
जब मिले फुर्सत तुम्हें लड़ाइयों से 
 
मानों की गुमानों की 
 
भाषाओं की रंगों की 
 
लिंगों की 
 
सीमाओं की 

और फिर बचे रहना

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