अजनबी

अजनबी

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बहुत तय कर लिया यह सफर,

कहीं अंजाना फिर ना सफर हो जाए।

उलझनें सुलझानी हैं बहुत अभी,

शायद यहीं से सब कुछ हल हो जाए।


चले थे अभी तक बस थोड़ी ही दूर,

काफी दूरियां तय करना बाकी है।

साथ निभाने का वादा वो करें तो,

आखिरी दम तक जीवनसाथी हैं।


जिंदगी में उस अजनबी से मिलकर,

अनजाना सा वास्ता बन गया।

चाहत तो यूँ ही बरकरार थीं,

वो ही मंजिल और रास्ता बन गया।


खबर थीं मुझे उस वक्त भी कि,

मैंने कयामत को गले लगाया है।

क्योंकि शायद मन्नतों के बाद,

उसे हमने अब फिर से पाया है।


मुलाकातों चलती रहीं फिर भी,

सब कुछ मानो जैसे अनजाना था।

बहुत दूर अजनबियों के शहर में,

हम दोनों का दिल दिवाना था।


इस बार कुछ मजबूरियों के चलते,

वह फिर मुझे ठुकराना चाहती हैं।

जो उसकी कदर तक नहीं करता,

जाने क्यों उसे ही पाना चाहती है।


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