Quotes New

Audio

Forum

Read

Contests


Write

Sign in
Wohoo!,
Dear user,
कुछ अनसुलझे सवाल?
कुछ अनसुलझे सवाल?
★★★★★

© Sweta Kansal

Drama Fantasy

1 Minutes   7.1K    1


Content Ranking

ज़िंदगी दो पल की

कल का कुछ ठिकाना नहीं

आज सवेरा है

कल के अंधेरे का गुमान नहीं

 

रंग-बिरंगी इसकी दुनिया है

कहीं धूप, कहीं छाव

इसकी दो कठपुतलियाँ है

 

बारी–बारी अपना खेल दिखाती है

सुख–दुख अपने संग

लेकर ये आती है

जब साथ हो दोनों का

तब इंद्रधनुष ये बनाती है

 

जीवन के सात रूपों को

एक साथ ये दर्शाती है

कभी गम का काला साया

तो कभी खुशी का फ़रमान ये लाती है

 

इसको समझना इतना आसान नहीं

कठपुतली का नाच ये सब की बात नहीं

 

रंग रंगीली इस दुनिया के

खेल बड़े निराले हैं

इसे समझने जो बैठे

वो खुद कठपुतली का नाच दिखलाते हैं

 

ज़िंदगी को समझना

तारों को गिनने से कम नहीं

इसके अंदर उलझते जाना

आसमान को छूने से कम नहीं

 

इसको समझ पाना

इंसान के बस की बात नहीं

 

ना जाने क्यो?

ज़िंदगी इतनी आसान नहीं?

#Zindagi # Kathputli # Sawaal

Rate the content


Originality
Flow
Language
Cover design

Comments

Post

Some text some message..