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ट्रैक्टर
ट्रैक्टर
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© Arpan Kumar

Others Inspirational Comedy

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इन दिनों ट्रैक्टर
खेतों से अधिक
घर के अहाते में
रहना चाहता है
गुलाबी ठंड की आहट
का नतीजा है
या उसे कोई
गुलाबी चेहरा भा गया है
जाने क्या है...
ट्रैक्टर इन दिनों
कुछ अधिक
सजा संवरा
रहना चाहता है....

उसके पहिए
बिल्कुल धुले-धुले
दिखते हैं
उसकी बॉडी
कुछ अधिक
चमकने लगी है
उसके सिर पर
फहराता पताका
हवा से
बातें कर रहा है
....


बहुत कुछ हो रहा है
पहली बार
उसके जीवन में
जब से
उसकी स्टेयरिंग व्हील में
बांधी है
किसी ने अपनी
सतरंगी चुनरी

टैक्टर दिन-दिन भर
किसी के आने की बाट
जोहता रहता है...
आए दिन बैठते ही
रहते हैं लोग
उसपर
मगर यह पहली बार है
कि वह किसी को
बिठाना चाहता है
अपनी गोद में

ट्रैक्टर विकल है
मगर हाय री किस्मत!
अपनी विकलता
किसी से बाँट नहीं सकता
उसे दुःख हो रहा है
पहली बार
अपने जीवन में
कि वह हाड़ मांस का
कोई प्राणी क्यों नहीं
कि मुहावरे में ही सही
किसी को
अपना सीना चीरकर
दिखा सकता वह
अपने अंदर का तूफ़ान

ट्रैक्टर एक मशीन है
वह प्रेम नहीं कर सकता
उसे तैयार करते हुए
यही बताया है
उसके निर्माता ने
ट्रैक्टर जानना चाहता है...
निर्माता,
कब और कैसे
बन जाते हैं
नियंता

ट्रैक्टर टटोलता है
अपनी ज़मीन
खड़ा है वह जिसपर
वहाँ दिखते हैं उसे
अपनी अधीरता के
कुछ चिह्न
मगर मिट्टी की गवाही
मिट्टी ठहरी...

वह सोचता है ...
है अगर वह एक मशीन
तो धड़कता क्यों है
और जो जी रहे हैं
यंत्रवत
वे इंसान
उससे अलग
किस तरह हैं
इन सवालों से
टकराता ट्रैक्टर
गहराते अँधेरे में
धँसता चला जाता है

ट्रैक्टर के बहाने मनुष्य की यांत्रिकता पर कुछ सवाल...

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