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बरसो घन
बरसो घन
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© Rahul Shrivastava

Drama

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बरसो घन ज़ोर - ज़ोर

बरसो घन ज़ोर - ज़ोर

हिले धरा हिले गगन

गरजो कर शोर - शोर

बरसो घन ज़ोर - ज़ोर

बरसो घन ज़ोर - ज़ोर


बरसो घन ज़ोर - ज़ोर

बरसो घन ज़ोर - ज़ोर



पक्षियों का होगा गान

धरती में आयें प्रान

जमुना के तट पे कूके

मुरली की तान

डाल -डाल कोयल गाये

नाचे वन मोर- मोर


बरसो घन ज़ोर - ज़ोर

बरसो घन ज़ोर - ज़ोर


पन्ने सब पीत पड़े

बर्तन सब रीत पड़े

घने वटवृक्ष ज्यों लगते हैं ठूँठ खड़े

उपवन के आँगन को

भर दो तुम पोर-पोर


बरसो घन ज़ोर - ज़ोर

बरसो घन ज़ोर - ज़ोर



विरह में कलपती है

मिलन को तड़पती है

रात किसी नागिन सी

बार बार डसती है

मिलन का प्रभात गीत

गाओ तुम ज़ोर- ज़ोर


बरसो घन ज़ोर - ज़ोर

बरसो घन ज़ोर - ज़ोर


रंग सब बेरंग हुये

प्रेमी सब मंतग हुये

नीर बहते

पीर सहते

नयन ज्यों त्रिभंग हुये

सतरंगी इन्द्रधनुष सँधान हो

हर ओर - ओर


बरसो घन ज़ोर - ज़ोर

बरसो घन ज़ोर - ज़ोर...!

Rain Seasons Life

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