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तमाम उम्मीदों के बावजूद
तमाम उम्मीदों के बावजूद
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© Lalit Mandora

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मुझे पता था
उसे प्रेम भी है
लेकिन सावर्जनिक करने में ड़रती है
सोचती होगी
क्या प्रेम किसी से करने में धोखा तो नहीं
लड़के ने इस बात को समझा
उसे पता था कि उसका प्रेम सच्चा है
नियत समय पर लड़की नहीं आई
लड़के का दिल टूट गया
उसके बावजूद भी वह खुश था
कि उसको भी किसी ने प्रेम किया
क्या हुआ अगर उसका प्रेम नियत समय पर मिलने नहीं आया
कोई मजबूरी भी हो सकती है
या
कोई काम ही निकल आया हो
उम्मीदों का क्या है
वैसे भी उम्मीदों पर दुनिया टिकी है
जिसे आपको स्वीकारना ही होगा
कुछ लोग पूरी पूरी जिंदगी गुज़ार देते है
एक दीदार के लिए
अरे!
हम वे है जिसने उसको समूचा ही
अपने भीतर ही जज़्ब कर लिया
जब मुलाकत करनी होगी
कर लेंगे
जब प्यार करना होगा
प्यार भी कर लेंगे
गुस्सा भी हो जाएंगे
यह अपने ऊपर है
अपनी सल्तनत है जिसके महाराजाधिराज हम है
हम ही रहेंगे
आशिक ने आह भरी
और
प्रेमिका का जहाज उड़ गया
अपने सपनों की दुनिया में
सपनों का क्या
उनका काम है आना
ओ आशिक!
चल अपने ठौर
अपने पास प्यार है जिसकी सल्तनत भी अपने पास है
और मलकियत भी।

#तमाम उम्मीदों के बावजूद poem

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