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इंतेज़ार
इंतेज़ार
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© Dr Hemant Kumar

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इंतेज़ार

 

इस जंगल के

  दरख्तों से

क्यों पूछते हो

इनकी खैरियत।

 

इनके

दहशतज़र्द चेहरों पर तो

ख़ुद ही चस्पा है

रोज तिल तिल कर

मरते हुए

अपने जिबह होने के

इंतेज़ार की

तस्वीरें।

000

डा0हेमन्त कुमार

आर एस-2/108 राज्य सम्पत्ति

आवासीय परिसर,सेक्टर-21

इन्दिरानगर,लखनऊ-226016

मोबाइल-09451250698

 

 

इन्तजार कविता डा0हेमन्त कुमार

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