Kumar Naveen

Inspirational


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क्या सचमुच हम आज़ाद हैं?

क्या सचमुच हम आज़ाद हैं?

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आज़ादी के वर्षगांठ पर,

पुछूँ प्रश्न तेरे मन से।

है शपथ तुझे जनमानस की,

उत्तर देना अंतर्मन से।।

बेड़ियों में कैद अब भी,

सिसकियाँ आबाद है।

हे धरा शिरोमणि मातृभूमि,

क्या सचमुच हम आज़ाद हैं ?


भूख से व्याकुल कई,

आहुतियाँ गतिमान है।

निर्भया को ग्रास करने,

दानव कई विद्यमान है।

सिसक रही है बेटियाँ,

चारों तरफ जल्लाद है।

हे धरा शिरोमणि मातृभूमि,

क्या सचमुच हम आज़ाद हैं?


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