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बेबाक बात
बेबाक बात
★★★★★

© Jitendra Pathak

Romance

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क्यों न बात करें, चलो बेबाक करें

कुछ पल हैं बचे, इन्हें भी राख करें।

 

न रह जाये कोई हसरत दिल में बाक़ी

कुछ ऐसा मैं और तुम मिल कर साथ करें।

 

बारिश कि तरह बरस जायें कभी

तो कभी हवा बन यूं ही बह जाया करें।

 

न कोई रोके-टोके, न हो सरहद कोई

बस यूं ही आजाद मैं और तुम रहा करें

आज मिला है वक्त खुल के कहना का।

 

क्यों न बात करें, चलो बेबाक करें

कुछ पल हैं बचे, इन्हें भी राख करें।      

बेबाक बात

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