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काला सच
काला सच
★★★★★

© Dr.Sanjay Yadav

Tragedy

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बैठें हो जो शिखर पर ,

उन्हें ज़मीं कहाँ दिखाई देती है !!

कारोबार ही हो जिनका लहू का ,

उन्हें आँखों की नमी कहाँ दिखाई देती है !!

जिस्मानी सौन्दर्य ही आधार हो जिनके प्रेम का ,

उन्हें प्रेम की गहराई कहाँ दिखाई देती है !!

मन ही मैला हो जिनका ,

उन्हें किसी की अच्छाई कहाँ दिखाई देती है !!

दौलत की काली पट्टी ही बँधी हो जिसकी आँखो पर ,

उसे किसी निर्दोष की बेगुनाही कहाँ दिखाई देती है !!

प्रेम लहू आधार

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