Quotes New

Audio

Forum

Read

Contests

Language


Write

Sign in
Wohoo!,
Dear user,
ग़ज़ल
ग़ज़ल
★★★★★

© Alok Yadav

Drama

1 Minutes   6.5K    4


Content Ranking

चाँद से है, या है तुमसे चाँदनी ?

चाँद था , पर थी न पहले चाँदनी

देर तक छत पे टहलता मैं रहूँ

और पहलू में हो मेरे चाँदनी


हाल क्या होगा तेरा ओ चन्द्रमा

जा रही हूँ , जो ये कह दे चाँदनी

रात भर आवारगी करती है क्यों

किसकी चाहत में है भटके चाँदनी


आग बरसाने को काफ़ी हैं पलाश

क्या ज़रूरी है कि निकले चाँदनी ?

रात की दहलीज़ पे बैठा है दिन

बस ये ख़्वाहिश है कि आए चाँदनी !

Gazal Moon Light

Rate the content


Originality
Flow
Language
Cover design

Comments

Post

Some text some message..