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नो लख गाय सुनी हम नंद के
नो लख गाय सुनी हम नंद के
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© Raskhan Kavya

Classics

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नो लख गाय सुनी हम नंद के, 

तापर दूध दही न अघाने।

माँगत भीख फिरौ बन ही बन, 

झूठि ही बातन के मन मान।

और की नारिज के मुख जोवत, 

लाज गहो कछू होइ सयाने।

जाहु भले जु भले घर जाहु,

चले बस जाहु वृंदावन जानो।

रसखान नो लख गाय सुनी हम नंद के उत्कृष्ट रचना

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