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A Salute to Shaheed Bhagat Singh, Sukhdev & Rajguru
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© Ashish Aggarwal

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काफ़िला इन्कलाबियों का

सुनहरे लफ़्ज़ों में इक सन्देश दे गया काफ़िला1 इन्कलाबियों का,

कि कोशिशों के बाद ही शुरू होता है सिलसिला कामयाबियों का।

 

मोमबत्ती की लौ में वो सेक कहां जो उनके खौलते खून में था,

अन्दाज़ा नहीं लगाया जा सकता सरफ़रोशी में सुलगी बेताबियों का।

 

काम को अंजाम2 देने के लिए इंतज़ार करना इनकी फ़ितरत नहीं,

हुकूमतों के पास भी कोई जवाब नहीं था इन हाज़िर-जवाबियों का।

 

पिंजरे में रहने वाला ही समझ सकता है आज़ादी की कीमत को,

हर आज़ाद कर्ज़दार है गुलामी के तालों को मिली इन चाबियों का।

 

फाँसी के फन्दों को हंसते-२ फूलों का हार समझ गले से लगा लिया,

जल्लाद का ज़मीर भी ज़िल्लत3 में था देखकर जलवा नायाबियों4 का।

 

कमी तब भी नहीं थी मुल्क में दगाबाजों और गद्दारों की अशीश,

अपने दम पर ये पर्दाफ़ाश कर गए बहरूपियों और नकाबियों का।

 

 

1.caravan 2.end 3.insult 4.rare

Shaheed Bhagat Singh Sukhdev & Rajguru

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