Quotes New

Audio

Forum

Read

Contests

Language


Write

Sign in
Wohoo!,
Dear user,
मंदिर और मधुशाला
मंदिर और मधुशाला
★★★★★

© Jagdish Pandey

Others

1 Minutes   20.5K    3


Content Ranking

कहीं धूम मची है मदिरा की तो कहीं मची मधुशाला की
शाम ढलते ही लग जाती है होड़ जहाँ देखो प्याला की

घर में एक दाना नहीं बच्चे भूख से बिलख रहे
ख़्याल तो उनका आता नहीं और सुध लेते हैं मधुबाला की

होश हवाश सब खो देते हैं जानें क्या क्या कहते हैं
पहचान खो कर अपनो के ही तन के कपड़े खींचते हैं

नारी थी पूजनीय जहाँ वहाँ इज्ज़त लुटती है बाला की
शाम ढलते ही लग जाती है होड़ जहाँ देखो प्याला की

जगदीश पांडेय " दीश "

 

मधुशाला मंदिर

Rate the content


Originality
Flow
Language
Cover design

Comments

Post

Some text some message..