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ओ री चँदनिया !
ओ री चँदनिया !
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© Ankit Mishra

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ओ री चँदनिया , निंदिया में आकर, तू ना जाना रे |
तेरी यादों में, पलकें बिछाऐ सदियों से मैं जागा रे |
चंदा  से भी पूछा मैंने, तारों को भी रोका; उड़ते चकोर से पता तेरा पूछा | 
कोई कहे सपना है तू, कोई कहे धोखा; किसी की ना मानी मैंने, आँसुओं को पोंछा |
ओ री चँदनिया , निंदिया में आकर, तू ना जाना रे |
तेरी यादों में, पलकें बिछाऐ सदियों से मैं जागा रे |
फूलों का पलंग है मेरा, सपनों की है चादर; बदली सा झूमता है मेरी माँ का आँचल |
धीमे-धीमे हौले-हौले पवन हिचकौले, चंदा  की कहानी संग नींद डाले डोरे |
ओ री चँदनिया , निंदिया में आकर, तू ना जाना रे |
तेरी यादों में, पलकें बिछाऐ सदियों से मैं जागा रे |
कहाँ तू चली गई है किसने तुझे रोका, बदली के पीछे मैंने चंदा  को था देखा | 
मेरे सपनों में पंख लगाके, मेरी आँखों में रैन बसा के, तूने कोई जादू किया रे |
ओ री चँदनिया , निंदिया में आकर, तू ना जाना रे |
तेरी यादों में, पलकें बिछाऐ सदियों से मैं जागा रे |
छोटे-छोटे हाथ है मेरे, बड़ी बड़ी बातें, तुझ बिन अधूरी मेरी बचपन की रातें |
माना तू है चंदा  की प्यारी दुल्हनिया, कल नहीं सोऊँगा तुझे देख बिन चँदनिया  |
ओ री चँदनिया , निंदिया में आकर, तू ना जाना रे |
तेरी यादों में, पलकें बिछाऐ सदियों से मैं जागा रे |
ओ री चँदनिया , निंदिया में आकर, तू ना जाना रे |
तेरी यादों में, पलकें बिछाऐ सदियों से मैं जागा रे!!!

 

 

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