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भटक गया हूँ
भटक गया हूँ
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© Raman Sharma

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भटक गया हूँ मैं ज़िन्दगी की इन अनजान राहों में --- कोई उमीद की नई दिशा नज़र नहीं आती मुझे इस जहाँ में , जब से हुआ है प्यार तुमसे ख़ुद की ख़बर नहीं तब से ---- आज भी मचलता है मेरा दिल तुमसे बात करने को इन लम्हों में ,   सनम मत जा मुझे छोड़ के यूँ अकेले इस तरह ------ याद रखना होगा इंतेज़ार बाद में तुझे भी मेरा इस जहाँ में , मुझे ढूँढती ढूँढती हो जाऐगी पागल तू इस कदर ---- और आखिर में हार जाऐगी तू और जीत जाऊँगा मैं 

.याद

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